प्रवचन — शास्त्र की व्याख्या
यह शास्त्रीय स्वरूप है: किसी ग्रन्थ — जैसे किसी उपनिषद् या भगवद्गीता — की क्रमबद्ध व्याख्या, जो संस्कृत श्लोक से आरम्भ होकर उसके अर्थ, भाष्यों और जीवन के लिए उनके निहितार्थों तक पहुँचती है। प्रवचन प्रायः कई दिनों तक चलते हैं, और प्रत्येक सत्र के साथ विवेचन क्रमशः आगे बढ़ता है।